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इंसाफ की आस में 'जनता का दरबार', चौथे दिन भी उमड़ी भारी भीड़

मृत छात्र के माता-पिता ने लगाई न्याय की गुहार

13 Jun 2026

इंसाफ की आस में 'जनता का दरबार', चौथे दिन भी उमड़ी भारी भीड़

कोलकाता। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'जनता के दरबार' के चौथे दिन भी फरियादियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सॉल्टलेक स्थित कार्यालय में आयोजित इस जनसुनवाई कार्यक्रम में शनिवार को भी अपनी-अपनी गंभीर समस्याएं लेकर सैकड़ों लोग पहुंचे। सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त के बीच, वैध पहचान पत्र और पूर्व निर्धारित टोकन नंबरों की कड़ाई से जांच के बाद ही लोगों को परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई। इस जनसुनवाई में सबसे हृदयविदारक दृश्य उस वक्त देखने को मिला, जब बांसद्रोणी स्थित महर्षि विद्या मंदिर स्कूल के मृत छात्र आयुष कुमार नाथ के बेबस माता-पिता न्याय की उम्मीद में एक बार फिर मुख्यमंत्री के दरबार पहुंचे। उनके साथ स्कूल के कई अन्य आक्रोशित अभिभावक भी एकजुटता दिखाने के लिए मौजूद थे। पीडि़त परिवार का सीधा आरोप है कि स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही ने उनके मासूम बच्चे की जान ले ली, लेकिन रसूख के आगे अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।
परिजनों ने रुंधे गले से घटना का ब्योरा देते हुए बताया कि बीती 13 मई को तीसरी कक्षा का छात्र आयुष स्कूल की अवधि के दौरान अचानक बेहद अस्वस्थ हो गया था। आरोप है कि बच्चे की तबीयत बिगडऩे के बावजूद स्कूल प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उसे लंबे समय तक बिना किसी इलाज के कक्षा में ही बैठाए रखा। बाद में छुट्टी के वक्त मची अफरा-तफरी के दौरान सीढिय़ों से गिरकर मासूम आयुष के सिर में गंभीर चोटें आईं। कई बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने और लगातार 11 दिनों तक वेंटिलेटर व कोमा में जिंदगी और मौत की जंग लडऩे के बाद, आखिरकार 24 मई को उसने दम तोड़ दिया। 
मृतक छात्र के पिता आशिष कुमार नाथ ने स्कूल प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके बेटे की मौत पूरी तरह एक प्रशासनिक हत्या है। उन्होंने बताया कि बेटे की मृत्यु के तुरंत बाद 24 मई को ही स्थानीय थाने में नामजद शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद जब 26 मई को न्याय की मांग को लेकर तमाम अभिभावकों ने स्कूल के मुख्य गेट के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया, तो पुलिस और प्रबंधन ने उनकी जायज मांगों पर कार्रवाई करने के बजाय उन पर बर्बर बल प्रयोग किया। 
पीडि़त पिता का आरोप है कि उन्हें और अन्य प्रदर्शनकारी अभिभावकों को डराने-धमकाने के लिए झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की साजिश रची जा रही है। 

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